शेर, ग़ज़ल, नज़्म, क़सीदा, मसनवी – फर्क क्या है?

 इस भाग में उर्दू शायरी की प्रमुख काव्य विधाओं — शेर, ग़ज़ल, नज़्म, क़सीदा, मसनवी — का विस्तार से परिचय दिया गया है। प्रत्येक विधा की संरचना, शैली, विषय-वस्तु और उद्देश्य को सरल और सहज भाषा में समझाया गया है, ताकि नए पाठकों को इनके बीच का स्पष्ट अंतर समझ में आ सके। उदाहरणों के माध्यम से यह बताया गया है कि शेर एक स्वतंत्र भाव होता है, ग़ज़ल में मतला और मक़ता जैसे तत्व होते हैं, नज़्म में विषयगत एकता होती है, क़सीदा में प्रशंसा और वर्णन की प्रधानता होती है, जबकि मसनवी एक लंबी कथा-काव्य रचना होती है। यह भाग उर्दू शायरी की विविधता को पहचानने और उसे समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

शेर, ग़ज़ल, नज़्म, क़सीदा, मसनवी – फर्क क्या है?



 

2. शेर, ग़ज़ल, नज़्म, क़सीदा, मसनवी – फर्क क्या है?

उर्दू शायरी की विभिन्न विधाओं में कुछ शब्द अक्सर एक-दूसरे के साथ उपयोग किए जाते हैं जैसे शेर, ग़ज़ल, नज़्म, क़सीदा, और मसनवी। हालाँकि ये सब शायरी के अंग हैं, मगर इनमें स्पष्ट अंतर होता है – रचना की संरचना, उद्देश्य, विषयवस्तु और प्रस्तुति के अनुसार।

आइए इन पाँचों का गहराई से अंतर समझते हैं:

1.शेर

परिभाषा:
 
शेर उर्दू शायरी की सबसे छोटी और मौलिक इकाई है। इसमें दो पंक्तियाँ होती हैं जिन्हें 'मिसरा' कहा जाता है:

पहली पंक्ति: मिसरा-ए-उला

दूसरी पंक्ति: मिसरा-ए-सानी

विशेषता:

  • एक शेर स्वतंत्र अर्थ रखता है।
  • यह किसी भी भाव, विषय या विचार को दो पंक्तियों में पूरी तरह व्यक्त कर सकता है।
  • शेर को बिना ग़ज़ल के भी पढ़ा और सराहा जा सकता है।

उदाहरण:

हजारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले,
  बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।

ग़ालिब

🟢 नोट: हर ग़ज़ल में कई शेर होते हैं, पर हर शेर ग़ज़ल नहीं होता।

2. ग़ज़ल

परिभाषा:
 
ग़ज़ल शेरों की एक शृंखला है, जिनमें हर शेर अपने-आप में स्वतंत्र होता है, लेकिन सारे शेर एक ही बहर (छंद), क़ाफ़िया (तुक) और रदीफ़ (धृव-पद) पर आधारित होते हैं।

संरचना:

  • पहला शेर: मतला (मطلع) – इसमें दोनों मिसरों में काफिया और रदीफ होते हैं।
  • अंतिम शेर: मक़ता (मقطع) – इसमें शायर अपना तख़ल्लुस (उपनाम) शामिल करता है।
  • बीच के शेर: सिर्फ़ दूसरी पंक्ति में काफिया-रदीफ आते हैं।

मुख्य उद्देश्य:

  • भावनाओं की बारीक अभिव्यक्ति (विशेषकर इश्क़, दर्द, फ़लसफ़ा, रूहानियत)
  • हर शेर का स्वतंत्र अर्थ होता है।

उदाहरण:

कोई उम्मीद बर नहीं आती,
  कोई सूरत नज़र नहीं आती।

ग़ालिब

3. नज़्म

परिभाषा:
 
नज़्म एक ऐसी कविता है जिसमें शेर आपस में भावनात्मक और कथ्यगत रूप से जुड़े रहते हैं, यानी सभी पंक्तियाँ एक कहानी या विषय को आगे बढ़ाती हैं।

विशेषता:

  • यह निरंतर विचार या भाव को प्रस्तुत करती है।
  • यह छंदबद्ध या मुक्त दोनों हो सकती है।
  • इसका कोई तयशुदा ढांचा नहीं होता।

उदाहरण विषय:

  • मातृभूमि, राजनीति, जीवन-दर्शन, स्त्री-विमर्श, प्रेम, समाज, आदि।

प्रसिद्ध उदाहरण:

"मुझसे पहली सी मोहब्बत..." — फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
 
एक लंबी नज़्म जिसमें इश्क़ से समाज की सच्चाई तक की यात्रा है।

4. क़सीदा 

परिभाषा:
 
क़सीदा एक प्रकार की प्रशंसा-काव्य है जो किसी राजा, संत, वीर, संरक्षक या किसी विषय की महिमा का वर्णन करती है।

विशेषता:

  • लम्बी रचना होती है, 15–100 शेरों तक हो सकती है।
  • फारसी शैली से प्रभावित अलंकारिक भाषा।
  • कभी-कभी इसमें आत्मप्रशंसा या उपदेशात्मक तत्व भी होते हैं।

मुख्य उद्देश्य:

तारीफ़, शौर्य, धन्यवादी प्रशंसा, या राजकीय स्तुति

प्रसिद्ध शायर:

सौदा, हाली

5. मसनवी 

परिभाषा:
 
मसनवी एक दीर्घकाव्य होती है जो किसी प्रेम-कथा, धार्मिक आख्यान, युद्धकथा या ऐतिहासिक प्रसंग को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करती है।

संरचना की विशेषता:

  • हर शेर में नई तुक होती है, यानी हर शेर में नई क़ाफ़िया योजना
  • छंद एक समान होता है (बहर एक सी)।
  • एक कहानी की तरह नाटकीय घटनाएँ होती हैं।

उदाहरण:

  • मसनवी-ए-रूमी – जलालुद्दीन रूमी की सूफ़ी मसनवी
  • मसनवी-ए-हज़रत अली, मसनवी-ए-नंदलाल इत्यादि।

सारणी द्वारा अंतर स्पष्ट करें:

विधा

संरचना

शेर स्वतंत्र?

विषय

लय/तुक

विशेषता

शेर

2 मिसरे

हाँ

कोई भी

नहीं ज़रूरी

सबसे छोटी इकाई

ग़ज़ल

कई शेर

हाँ

इश्क़, फ़लसफ़ा

एक जैसी बहर, काफ़िया-रदीफ़

हर शेर पूर्ण अर्थ रखता

नज़्म

अनुक्रमिक पंक्तियाँ

नहीं

समाज, दर्शन

आवश्यक नहीं

एक विचार को विस्तार

क़सीदा

लंबी कविता

नहीं

स्तुति, प्रशंसा

प्राचीन शैली

भव्यता, अलंकार

मसनवी

लंबी कहानी

नहीं

कथा/इतिहास

हर शेर में नई तुक

कथा-कविता का रूप


NOTE

उर्दू शायरी की ये विधाएँ अलग-अलग साहित्यिक ज़रूरतों और अभिव्यक्तियों को पूरा करती हैं।

  • ग़ज़ल दिल की बात करती है,
  • नज़्म समाज की,
  • क़सीदा सत्ता की,
  • मसनवी इतिहास और कथा की,
  • और शेर – किसी भी भावना को दो पंक्तियों में समेटने का हुनर है। 

 

 

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